सम्राट पृथ्वीराज: आखिर कौन थी वीरांगना संयोगिता? जिनकी प्रेम कहानी जगजाहिर है, जानें पूरी खबर

भारत के इतिहास में काफी सारे महान राजा हुए हैं, जिनमें सम्राट पृथ्वीराज चौहान का नाम अग्रणी पंक्ति में आता है। एक समय ऐसा था जब पृथ्वीराज चौहान ने विदेशी आक्रांता मोहम्मद गोरी को धूल चटा दी थी। इसी के संदर्भ में वर्तमान समय में अक्षय कुमार की फिल्म सम्राट पृथ्वीराज काफी सुर्खियां बटोर रही है। इस फिल्म को लेकर लगातार किसी ना किसी वजह से चर्चा होती रहती है। शुरुआत में जब इस फिल्म का ट्रेलर आया तो इसके नाम को लेकर करणी सेना ने विवाद खड़ा कर दिया था तत्पश्चात फिल्म का टाइटल बदलकर सम्राट पृथ्वीराज किया गया जो पहले सिर्फ पृथ्वीराज था।

फिल्म में महाराजा पृथ्वीराज चौहान और उनकी पत्नी संयोगिता के बारे में प्रेम कहानी को भी दर्शाया गया है। यह पूरी फिल्म महाकाव्य पृथ्वीराज रासो के लखन के आधार पर है। जिसे सम्राट पृथ्वीराज के दरबारी कवि चंद्रवरदाई ने लिखा था। इस महाकाव्य में एक ऐसा अध्याय भी है जिसमें राजकुमारी संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है इन की प्रेम कहानियां ऐसी थी जो हमेशा के लिए अमर हो गई।

महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान का अगर कभी सिर झुकाया तो उनकी राजकुमारी संयोगिता के सामने झुका है। एक शूरवीर होने के साथ-साथ वह सच्चे प्रेमी भी थे जो संयोगिता से बेहद प्रेम किया करते थे। उनका यह प्रेम प्रसंग मध्यकालीन इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। संयोगिता कन्नौज के महाराज जयचंद की बेटी थी और बेहद खूबसूरत और गुणवान थे। उनकी सुंदरता के चर्चे हर तरफ थे। उन्हें अप्सरा का एक दूसरा अवतार माना जाता था कभी भी उनकी सुंदरता के ऊपर कविताएं लिखा करते थे एक रूपवान होने के साथ-साथ वह बहादुर राजकुमारी भी थी जो घुड़सवारी करने में माहिर थी। इसके साथ ही तीरंदाजी और तलवारबाजी में भी उनका कोई जवाब नहीं था।

सम्राट पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता के बारे में बात करें तो संयोगिता के पिता जयचंद को पृथ्वीराज चौहान बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह दूसरे राज्यों को अपने अधीन करना चाहते थे। एक बार एक चित्रकार ने संयोगिता को पृथ्वीराज चौहान का चित्र दिखाया और वीरता का बखान किया। इसके बाद मन ही मन उन्हें पसंद करने लगी। संयोगिता के पिता जयचंद ने राज्य यह करने का फैसला लिया था। जिसमें पृथ्वीराज चौहान ने उनके वर्चस्व को मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद उनके बीच का मनमुटाव और अधिक बढ़ गया जयचंद ने अपनी बेटी संयोगिता के लिए स्वयंवर का ऐलान किया।

इस दौरान पृथ्वीराज चौहान को छोड़कर सभी राजा महाराजा वहां पहुंचने के लिए आमंत्रित किए गए। पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए जय शनि देव की मूर्ति बनाकर दरबार में लगा दी। क्योंकि वह उन्हें अपमानित करना चाहते थे लेकिन संयोगिता ने सभी राजकुमारों को एक तरफ छोड़कर मूर्ति को ही माला पहना दी और उनके साथ विवाह कर लिया।

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